अरिंदम और मिताली की कहानी (incomplete love)
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नदी के किनारे एक छोटा-सा गाँव था। भोर की रौशनी में काश के फूल लहरा रहे थे, और पक्षियों की चहचहाहट से चारों ओर जीवन जाग उठा था। इसी गाँव में रहता था अरिंदम — बचपन से ही शांत, शर्मीला और सोचने-विचारने वाला स्वभाव।
उसका इकलौता दोस्त थी मिताली। दोनों साथ में स्कूल जाते, पेड़ों पर चढ़ते, नदी किनारे बैठकर खेलते।
“मिताली! देख, नदी में कचुरिपाना (जलकुंभी) खिली है, जल्दी आ!”
👧 मिताली (हँसते हुए):
“आ रही हूँ, तू अकेले मज़ा लेगा क्या?”
🎙️ :
बचपन के दिन बड़े शांत और मधुर थे।
लेकिन एक दिन, अरिंदम के पिता, जो गाँव के स्कूल में शिक्षक थे, उन्होंने फैसला किया — अरिंदम को उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता भेजा जाएगा।
विदा के दिन, नदी किनारे खड़ी मिताली ने कहा —
👧 मिताली:
“तू लौटेगा न?”
👦 अरिंदम (चुपचाप सिर हिलाते हुए):
“हम्…”
🎙️ :
कोलकाता की ज़िंदगी में अरिंदम खो गया — पढ़ाई के बोझ में। मिताली के खत आते थे, लेकिन वह जवाब देर से देता।
गाँव का प्यार और शहर की सच्चाई के बीच उसका मन उलझने लगा।
एक दिन, मिताली के घरवालों ने तय किया — उसका विवाह एक अमीर व्यापारी के बेटे से होगा।
मिताली ने विरोध किया, लेकिन परिवार और समाज के दबाव में उसे झुकना पड़ा।
बरसात की एक रात, उसने अरिंदम को एक चिट्ठी लिखी —
👧 मिताली (चिट्ठी लिखते हुए, रोती हुई):
“मैं हार गई, अरिंदम।
अगर तू एक बार हिम्मत करके मेरा हाथ थाम लेता,
मैं सब लड़ाइयाँ लड़ लेती।
लेकिन तू चुप रहा...”
🎙️ :
चिट्ठी पढ़कर अरिंदम का दिल टूट गया।
रात को हॉस्टल के कमरे में अकेला बैठकर वह बार-बार सोचता रहा —
“क्या मैं इतना डरपोक था? सिर्फ एक बात नहीं कह सका?”
🎙️ :
कुछ महीनों बाद अरिंदम की ज़िंदगी में अनन्या आई — एक नृत्यांगना।
उसकी संगत में अरिंदम ने थोड़ी शांति पाई,
लेकिन गहरी रातों में, शराब के नशे में वह बस एक ही नाम लेता —
👦 अरिंदम (धीरे-धीरे रोते हुए):
“मिताली…”
🎙️ :
दो साल बीत गए।
मिताली अब एक बंधी हुई गृहस्थी में थी।
एक दिन कोलकाता जाते समय, उसने सड़क किनारे एक आदमी को धीरे-धीरे चलते देखा।
आँखों में कुछ पहचाना सा — अरिंदम।
🎙️ :
अरिंदम ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
बस दुःख और खालीपन के साथ वह भीड़ में खो गया।
🎙️ :
अरिंदम का शरीर अब टूट चुका था।
एक रात तेज़ बुखार में, खाँसी और नशे में वह बिस्तर पर गिर पड़ा।
अनन्या भागती हुई आई, उसकी आँखें भीग गईं।
लेकिन मृत्यु के क्षण में, अरिंदम ने बस एक नाम फुसफुसाया —
👦 अरिंदम (धीरे से, साँस टूटती हुई आवाज़ में):
“मिताली…”
🎙️ :
भोर की पहली रौशनी से पहले ही अरिंदम ने अंतिम साँस ली।
गाँव में खबर पहुँची।
मिताली खिड़की के पास बैठी, चुपचाप रोती हुई बोली —
👧 मिताली (आँखों में मुस्कान, भीतर से टूटते हुए):
“अगर तू एक बार हिम्मत करके मुझे पुकार लेता, अरिंदम…
सब कुछ अलग हो सकता था।”
🎙️ :
नदी किनारे हवा बह रही थी।
उस हवा में जैसे अरिंदम की आवाज़ तैर रही थी —
“मैं हूँ, मिताली…”
समाप्त।
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